सरल और संक्षिप्त पूजनविधि : बिना पंडित के खुद करें पूजा

275
सरल और संक्षिप्त पूजनविधि : आसानी से खुद करें पूजा
सरल और संक्षिप्त पूजनविधि से बिना पंडित के आसानी से खुद करें पूजा।

Short And Easy pooja method : सरल और संक्षिप्त पूजनविधि अब ज्यादा प्रासंगिक है। इससे कम समय में खुद पूजा कर सकते हैं। इसके लिए अधिक सामग्री की जरूरत नहीं। बिना पंडित व तामझाम के पूजा हो सकती है। यह विधि प्राचीन काल में प्रचलित थी। बाद में बाजारवाद की भेंट चढ़ गई।

पूजा की तीन प्रचलित विधियां

पूजा की तीन विधियां प्रचलित हैं। ये हैं-पांच उपचार, दस उपचार और सोलह उपचार। इसके साथ ही मानसिक पूजन विधि भी प्रचलित रही है। इनमें सामग्री होना जरूरी नहीं है। मानसिक रूप से सामग्री अर्पित की जाती है। अब पंडित की उपलब्धता कठिन है। ऐसे में सरल और संक्षिप्त पूजनविधि सर्वश्रेष्ठ विकल्प है। इसमें पांच उपचार की जानकारी दी जा रही है।

प्रकृति से जोड़ती है पूजा

योग, ध्यान और तपस्या मनुष्य को प्रकृति से जोड़ता है। इसके लिए समय और शांति जरूरी है। बदले परिवेश में यह सबके वश में नहीं है। इसलिए पूजा का प्रचलन बढ़ा। देवी-देवता का रूप ध्यान का आसान माध्यम है। यह भी मनुष्य को प्रकृति से जोड़ता है। इसीलिए पूजा का प्रचलन बढ़ा। अब समय की कमी और ज्यादा है। ऐसे में पूजन विधि में भी बदलाव जरूरी है।  

ऐसे करें पूजा की तैयारी

पूजा के लिए साफ स्थान पर पवित्र होकर बैठें। धूप और दीप जलाकर रखें। वहां अक्षत, फूल, चंदन या रोली और प्रसाद हो। जल, अरघी या चम्मच और साफ प्लेट भी रखें। यदि सारी सामग्री न मिले तो परेशान न हों। जो न मिले उसे मानसिक रूप से अर्पित कर सकते हैं। इसमें वस्तु का नाम लेकर मनसा परिकल्पय समर्पयामि मंत्र पढ़ें। सामने देवता की तस्वीर या मूर्ति रखें।

यह भी पढ़ें- जानें उंगलियों में छुपे राज, चुटकियों में दूर होगा दर्द

सरल और संक्षिप्त पूजनविधि

पहले जिनकी पूजा करनी है उनका ध्यान करें। फिर दाएं हाथ में अक्षत लेकर देवी/देवता का आवाहन करें। आवाहन के लिए यह मंत्र पढ़े।

ऊं भूर्भुव: स्व: —-( देवी/देवता का नाम) इहा गच्छ, इह तिष्ट, स्थापयामि, पूजयामि नम:।

मंत्र पढ़ने के बाद अक्षत को थाली में डाल दें। फिर अरघी/चम्मच में जल लेकर मंत्र पढ़ें।

एतानि पाद्यार्चमनीयस्नानीय पुनराचमनीयानि समर्पयामि —-(देवी/देवता का नाम) नम:।

थाली में जल डाल दें। फिर हाथ में फूल लेकर उसमें चंदन लगाएं। इसके बाद निम्न मंत्र पढ़ कर थाली में डाल दें।

ऊं भूर्भुव: स्व: —-(देवी/देवता का नाम) नम: चंदानु लेपनम समर्पयामि।

इसके बाद अक्षत हाथ में लें। फिर निम्न मंत्र पढ़कर थाली में डालें।

ऊं भूर्भुव: स्व: —-(देवी/देवता का नाम लेकर) नम: अक्षतान समर्पयामि।

फिर फूल उठाकर निम्न मंत्र पढ़ें। मंत्र पढ़ने के बाद उसे थाली में रखें।

ऊं भूर्भुव: स्व: —-(देवी/देवता का नाम) नम: पुष्पम् समर्पयामि।

अब अरघी में जल लें। उसे धूप के समक्ष घुमाते हुए निम्न मंत्र पढ़ें। इसके बाद जल को थाली में डाल दें।

ऊं भूर्भुव: स्व: —-(देवी/देवता का नाम) नम: धूपमाघ्रापयामि नम:।

इसी तरह दीप के सामने घुमाते हुए यह मंत्र पढ़ें। जल को थाली में डाल दें।

ऊं भूर्भुव: स्व: —-(देवी/देवता का नाम) नम: दीपम दर्शयामि।

अब अरघी में जल लें। उसे इस मंत्र से प्रसाद के चारों ओर घुमाएं। जल को थोड़ा प्रसाद में गिराते हुए शेष थाली में डाल दें।

ऊं भूर्भुव: स्व: —-(देवी/देवता का नाम) नैवेद्यं निवेदयामि।

इसके बाद पुनः अरघी में जल लें। अभीष्ट देवी/देवता का ध्यान करते हुए निम्न मंत्र पढ़ें। अंत में उसे थाली में डाल दें।

ऊं आचमनीयम जलं समर्पयामि।

आरती, प्रदक्षिणा व पुष्पांजलि

इसके बाद आरती करें। फिर अपने आसन पर ही खड़े हो जाएं। खड़े होकर चार बार वहीं घूमकर प्रदक्षिणा करें। फिर भक्ति व प्रार्थना सहित अभीष्ट को नमस्कार करें। इसमें उन्हें अपने स्थान पर भेजने का अनुरोध करें। इसके लिए देवी-देवताओं के अलग-अलग मंत्र हैं। माता लक्ष्मी से अपने साथ रहने की प्रार्थना की जाती है। अतः जटिलता से बचने के लिए इसे मानसिक करें।

यह भी पढ़ें- संक्षिप्त हवन विधि से बिना पंडित के खुद करें हवन

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here