नहीं होती ब्रह्मा की पूजा, त्रिदेव होने के बाद भी क्यों हैं उपेक्षित

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नहीं होती ब्रह्मा की पूजा, त्रिदेव होने के बाद भी क्यों हैं उपेक्षित
पुष्कर तीर्थ में स्थित परमपिता ब्रह्मा का मंदिर।

Why Brahma is not worshipped : नहीं होती ब्रह्मा की पूजा? त्रिदेव होने का बाद भी उपेक्षित हैं। बात अटपटी लगती है। जवाब सरल और स्पष्ट है। श्राप के कारण ब्रह्मा की पूजा नहीं होती। उनका एक ही प्राचीन मंदिर पुष्कर में है। वहीं ब्रह्म सरोवर है। उनकी पूजा न होने को लेकर कई कहानियां हैं। इनमें तीन प्रमुख हैं।

पहली कथा- पत्नी ने दिया श्राप

ब्रह्मा पुष्कर में यज्ञ के लिए पहुंचे। उनके साथ पत्नी सावित्री को बैठना था। उन्हें आने में देर हो रही थी। शुभ मुहूर्त बीता जा रहा था। तब ब्रह्मा ने सरस्वती से विवाह कर लिया। उन्हें पत्नी रूप में बैठा यज्ञ शुरू किया। थोड़ी देर बाद सावित्री पहुंचीं। अपनी जगह सरस्वती को बैठा देखा। वे क्रुद्ध हो गईं। उन्होंने ब्रह्मा की पूजा न होने का श्राप दिया।

पहले ब्रह्मा की होती थी ज्यादा पूजा

श्राप सुन देवता परेशान हो गए। उस समय त्रिदेव में ब्रह्मा ज्यादा पूजनीय थे। देव-दानव उन्हीं की पूजा करते थे। उन्होंने सावित्री से श्राप वापस लेने का अनुरोध किया। तब सावित्री ने रास्ता निकाला। उन्होंने कहा-सिर्फ पुष्कर में पूजा होगी। अन्य जगह मंदिर भी नहीं बनेगा। बनाने वाले का विनाश होगा। बाद के दिनों में ब्रह्मा के कुछ मंदिर बने। लेकिन उन्हें अपेक्षित मान्यता नहीं मिली।

दूसरी कथा- शिव ने कहा अपूज्य

ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता का विवाद हुआ। हल के लिए वे शिव के पास पहुंचे। महादेव ने उन्हें रास्ता बताया। उसके अनुसार दोनों को शिवलिंग की थाह लेनी थी। कहा कि पहले थाह लेने वाला श्रेष्ठ होगा। दोनों शिवलिंग के विपरीत दिशा में गए। विष्णु ने लौटकर कहा कि छोर नहीं मिला। ब्रह्मा ने छोर पाने की बात कही। यह गलत जानकारी थी। क्रुद्ध शिव ने ब्रह्मा को अपूज्य कहा। ब्रह्मा ने क्षमायाचना की। तब शिव ने पुष्कर में पूजा की छूट दी।

ठुकराने से आहत अप्सरा ने दिया श्राप

ब्रह्मा का रूप मनमोहक था। उन्हें देख अप्सरा मोहिनी आसक्त हो गई। उन्होंने प्रणय निवेदन किया। ब्रह्मा ने मना किया। फिर समझाने की कोशिश की। वे नहीं मानीं। ब्रह्मा ने उन्हें पुत्री समान कहा। इससे मोहिनी क्रुद्ध हो गई। उन्होंने ब्रह्मा को श्राप दिया। कहा कि उनकी पूजा नहीं होगी। उनका मंदिर बनाने वाला नष्ट हो जाएगा। बाद में उन्होंने पुष्कर में पूजा की छूट दी। कथा की सत्यता पर विवाद संभव है। इतना तय है कि पहले की तरह नहीं होती ब्रह्मा की पूजा।

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