जानें इंद्रजाल का रहस्य, सिर्फ मनोरंजन नहीं इंद्र का है मायाजाल

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जानें इंद्रजाल का रहस्य।
भ्रमित करने वाली विद्या है इंद्रजाल।

Secret of Indrajaaj : जानें इंद्रजाल का रहस्य। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं है। यह इंद्र का बड़ा मायाजाल है। बहुत ही रहस्यपूर्ण है यह दुनिया। इसमें समूह को ही भ्रम में डाला जाता है। कुछ लोग इसे तांत्रिक विद्या मानते हैं। यह पूरी तरह से सही नहीं है। फारसी में इसे तिलिस्म कहा जाता है। यहां मैं इसके अधिकृत गुणों पर चर्चा करूंगा। 

इंद्र की इस विद्या के जनक थे भगवान दत्तात्रेय

भगवान दत्तात्रेय इसके जनक थे। उनसे यह विद्या इंद्र तक पहुंची। फिर राक्षसों की विद्या के रूप में प्रचलित हुई। इसी बल पर वे मायावी कहलाए। रावण इसका बड़ा ज्ञाता था। उसके दस सिर के पीछे भी यही विद्या थी। देवराज इंद्र को इसीलिए छली कहा जाता था। उनके छल की कथाएं चर्चित हैं। इंद्रजाल में अचानक काले बादल दिखने लगते हैं। कभी दिन में ही रात लगने लगती है। महाभारत में कृष्ण ने यही किया।

युद्ध जीतने व समूह को प्रभावित करने में उपयोग

इंद्रजाल का पहले व्यापक उपयोग था। इंद्र इसी के सहारे छल करते थे। भ्रम में डालकर विरोधी सैनिकों को परास्त कर देते थे। बाद में राजाओं ने भी इसका उपयोग किया। जनसमूह को प्रभावित करने के लिए प्रयोग किया। चाणक्य के अर्थशास्त्र में इसका उल्लेख है। उनके अनुयायी कामंदक ने इसका जिक्र किया है। उन्होंने लिखा-शासकों के लिए लोगों को मूर्ख बनाना आसान नहीं। वे आसानी से बात नहीं मानते। तर्क करते हैं। ऐसे में उन पर इंद्रजाल ही उपयोगी है।

कुछ तांत्रिकों ने दुरुपयोग किया

प्रभाव बढ़ाने के लिए तांत्रिकों ने इसका दुरुपयोग किया। उन्होंने इस मायावी विद्या के साथ तंत्र-मंत्र को जोड़ा। इसके लिए सम्मोहन, वशीकरण आदि का उपयोग किया। उन्होंने इससे लोगों को नुकसान पहुंचाया। इससे यह शानदार ज्ञान बदनाम हुआ। इसीलिए इसे काला जादू व तांत्रिक क्रिया कहा गया। यह विद्या विदेश में भी प्रचलित रहा है। अब जादूगर इसका उपयोग करते हैं।

मनोरंजन के साथ बना रोजगार बना

बाद में यह मनोरंजन के साथ रोजगार बना। हजारों जादूगर इससे रोजगार चला पाए हैं। इसकी ताकत सामूहिक वशीकरण है। उसमें प्रकाश, रंग और तेजी का प्रयोग होता है। तेजी को हाथ की सफाई भी कहते हैं। बाजार में इस पर ढेर सारी किताबें हैं। उनमें कई भ्रामक जानकारी है। बृहद इंद्रजाल व कौतुकरत्न भांडागार काफी प्रचलित है।

 

अगले अंक में पढ़ें – बौद्धिक करामात है इंद्रजाल, कालाजादू व तांत्रिक प्रयोग ने बदनाम किया।

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